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बुधवार, 19 जनवरी, 2005 को 13:49 GMT तक के समाचार
 
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सुरक्षा के लिए फ़लस्तीनियों की तैनाती
 
एक नाक़ा
चेक नाक़ों पर इसराइली की जगह फ़लस्तीनी तैनात होंगे
फ़लस्तीनी प्रशासन ने इसराइल के ख़िलाफ़ चरमपंथियों के हमले रोकने के लिए अपने सुरक्षा बलों को तैनात करने का फ़ैसला किया है.

फ़लस्तीनी कमांडर जनरल अब्दुल राज़ेक़ माजेदेह ने कहा है कि ग़ज़ा पट्टी और इसराइल की सीमा पर सुरक्षा बल तैनात किए जाएँगे ताकि “हमले न हो सकें.”

ये फ़ैसला दक्षिणी ग़ज़ा में चरमपंथी संगठन हमास की ओर से किए गए एक आत्मघाती हमले के बाद किया गया.

इस हमले में एक इसराइली सुरक्षा गार्ड की मृत्यु हो गई थी.

फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने मंगलवार को हमास नेताओं से मुलाक़ात करके उन्हें संघर्ष विराम के लिए राज़ी करने की कोशिश की.

जनरल माजेदेह ने बाद में पत्रकारों को बताया कि फ़लस्तीनी सुरक्षा बलों को शहर के अंदर तैनात किया जाएगा ताकि इस तरह के हमलों को रोका जा सके.

ग़ज़ा और इसराइल की सीमा पर अक्सर फ़लस्तीनी चरमपंथियों और इसराइली सुरक्षा बलों के बीच गोलीबारी होती रहती है.

फ़लस्तीनी चरमपंथी इसराइली सुरक्षा चौकियों को निशाना बनाने के लिए रॉकेट भी दाग़ते रहते हैं.

बातचीत

बहरहाल, राष्ट्रपति महमूद अब्बास से बातचीत के बाद हमास नेताओं ने कहा कि माहौल सकारात्मक था और बुधवार को भी बातचीत जारी रहेगी.

 महमूद अब्बास को हालात समझने के लिए अतिरिक्त समय की कोई ज़रूरत नहीं है. ऐसा नहीं है कि उन्हें हालात की जानकारी ही न हो
 
अरियल शेरॉन

राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने कहा कि इसराइली क़ब्ज़े को हटाने के लिए बातचीत शुरू करने का वक़्त आ गया है.

उधर कुछ फ़लस्तीनी संगठनों ने कहा है कि वो संघर्ष विराम के लिए तैयार हैं बशर्ते ये दोनों तरफ़ से हो.

फ़लस्तीनी चरमपंथी संगठनों का कहना है कि अगर इसराइल की ओर से हमले बंद हों तो वो भी ऐसा करने को तैयार हो जाएँगे.

एक फ़लस्तीनी अधिकारी ने समाचार एजेंसी एपी को बताया कि राष्ट्रपति अब्बास ने येरूशलम में एक अमरीकी प्रतिनिधि से मुलाक़ात की.

इस मुलाक़ात में अमरीकी प्रतिनिधि से कहा गया कि संघर्ष विराम के लिए चरमपंथियों को राज़ी करने में अभी और समय लगेगा.

मंगलवार को इसराइल के प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ने ग़ज़ा के एरेज़ नाक़े पर अपने फ़ौजी अफ़सरों से मुलाक़ात की.

उन्होंने फ़लस्तीनी प्रशासन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास से कहा कि वो चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करें.

शेरॉन ने कहा, “महमूद अब्बास को हालात समझने के लिए अतिरिक्त समय की कोई ज़रूरत नहीं है. ऐसा नहीं है कि उन्हें हालात की कुछ जानकारी ही न हो”.

उम्मीद

महमूद अब्बास के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद उम्मीद की जा रही थी कि मध्यपूर्व में एक बार फिर शांति स्थापित हो सकेगी.

लेकिन ये उम्मीद चंद दिनों के भीतर ही फ़लस्तीनी आत्मघाती चरमपंथियों की कार्रवाई से ध्वस्त हो गई.

उसके बाद से इसराइल ने महमूद अब्बास पर दबाव और बढ़ा दिया.

इसी कारण उन्होंने हमास संगठन के नेताओं से मुलाक़ात की और उन्हें संघर्ष विराम के लिए राज़ी करने की कोशिश की.

 
 
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