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शुक्रवार, 14 जनवरी, 2005 को 21:47 GMT तक के समाचार
 
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फ़लस्तीनियों से संपर्क तोड़ने की घोषणा
 
अरियल शेरॉन
इसराइल ने महमूद अब्बसा से चरमपंथियों पर क़ाबू पाने को कहा
इसराइली प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ने कहा है कि फ़लस्तीनियों के साथ तब तक कोई संबंध नहीं रहेगा जब तक फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास चरमपंथियों के ख़िलाफ़ क़दम नहीं उठाते.

ये घोषणा ऐसे समय हुई है जब गुरूवार को ही गज़ा पट्टी के मुख्य मार्ग पर एक आत्मघाती हमले मे छह इसराइली नागरिक मारे गए थे.

फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास के चुने जाने के एक हफ्ते से भी कम समय में ये हमला हुआ है.

फ़लस्तीनी राष्ट्रपति चुनाव के बाद अरियल शेरॉन ने अब्बास को उनकी जीत पर शुभकामनाएँ भेजी थी और आशा जताई थी कि अब्बास से उनकी जल्द ही मुलाक़ात होगी.

मगर ताज़ा की गई घोषणा से अब उन आशाओं पर पानी फिर गया है.

अरियल शेरॉन के प्रवक्ता आसफ़ शारिव ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा, ‘इसराइल ने अंतरराष्ट्रीय नेताओं को सूचित किया है कि जब तक अब्बास आतंक को रोकने के लिए कोई प्रयास नहीं करते, उनके साथ कोई बैठक नहीं होगी.’

इस घोषणा पर फ़लस्तीनी मंत्री साएब एरेकात ने कहा, ‘हम इसराइल से शांति प्रक्रिया और बातचीत को फिर शुरू करने की अपील करते हैं क्योंकि इससे ही हिंसा को रोका जा सकता है.’

गुरुवार के हमले की संयुक्त ज़िम्मेदारी हमास और अल अक्सा मार्टियर्स ब्रिगेड समेत तीन चरमपंथी संगठनों ने ली है. ध्यान रहे कि अल अक्सा मार्टियर्स ब्रिगेड अब्बास के फ़तह आंदोलन से संबंध रखता है.

इस हमले में तीन फ़लस्तीनी चरमपंथी भी मारे गए थे.

इस हमले के कुछ ही देर बाद इसराइली हेलीकॉप्टरों ने पास के ही फ़लस्तीनी शरणार्थी शिविर पर रॉकेट दागे.

अब्बास की दुविधा

इससे पहले अब्बास का कहना था कि चरमपंथी हमले और फिर इसराइली सेना की कार्रवाई शांति के लिए फ़ायदेमंद साबित नहीं होतें हैं.

चुनावों के दौरान महमूद अब्बास ने आशा जताई थी कि वो चरमपंथियों को संघर्षविराम के लिए राज़ी कर सकते हैं.

यरुशलम में बीबीसी संवाददाता का कहना है कि यह हमला अब्बास के लिए पहली बड़ी परीक्षा की घड़ी साबित हो सकता है.

इसराइल ने स्पष्ट किया है कि जब तक अब्बास चरमपंथियों पर लगाम नहीं लगाएँगे तब तब अब्बास के साथ कोई बातचीत नहीं होगी.

मगर अब्बास चरमपंथियों के साथ बल से निपटने में विश्वास नहीं रखते बल्कि उनके साथ बातचीत करना चाहते हैं.

बीबीसी संववादाता का कहना है कि अगर इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच कोई संबंध ही नहीं रहेगा तो कोई रणनीति काम नहीं कर सकती.

 
 
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