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हमले से महमूद अब्बास पर दबाव | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इसराइल ने गज़ा पट्टी के मुख्य मार्ग पर गुरुवार को हुए हमले के बाद इलाक़े के सभी रास्तों को बंद कर दिया है. गुरुवार को एक आत्मघाती हमले मे छह इसराइली नागरिक मारे गए थे. हमला करने वाले तीनों फ़लस्तीनी चरमपंथी भी मारे गए हैं. फ़लस्तीन में नए राष्ट्रपति महमूद अब्बास को चुने जाने के एक हफ्ते से भी कम समय में ये हमला हुआ है. कहा जा रहा है कि इससे महमूद अब्बास की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं. इस हमले की ज़िम्मेदारी अल अक्सा मार्टियर्स ब्रिगेड ने ली है जिसका संबंध अब्बास के फतह आंदोलन से भी है. यरुशलम में बीबीसी संवाददाता का कहना है कि यह हमला अब्बास के लिए पहली बड़ी परीक्षा की घड़ी साबित हो सकती है. इसराइल चाहता है कि अब्बास दोषियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करें जबकि अब्बास लगातार कहते रहें हैं कि वो फ़लस्तीन के हथियारबंद गुटों के ख़िलाफ़ बलपूर्वक कार्रवाई करने के पक्ष में नहीं हैं. इस हमले के कुछ ही देर बाद इसराइली हेलीकॉप्टरों ने पास के ही फ़लस्तीनी शरणार्थी शिविर पर रॉकेट दागे जिसमें एक फ़लस्तीनी घायल हो गया. संयुक्त राष्ट्र की अपील इस बीच संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसराइल और फ़लस्तीन से सही मायनों में एक शांति प्रक्रिया शुरु करने की अपील की है. संगठन के अवर महासचिव कैरन प्रेंडरगास्ट ने महमूद अब्बास से अपील की कि वो ऐसी मज़बूत और सुधारवादी संस्थानों की नींव रखें जो इसराइली हमलों को हमेशा के लिए रोक सके. दूसरी ओर उन्होंने इसराइल से कहा कि वो कब्जी किए गए फ़लस्तीनी इलाक़ों में अपने लोगों को बसाने का काम बंद कर दे. ग़ज़ा और पश्चिमी तट के इलाक़ों में पिछले एक साल में यहूदी लोगों की संख्या छह गुना बढ़ी है. ये दोनों ही इलाके फ़लस्तीनी हैं जिन पर इसराइल ने 1967 के युद्घ में कब्ज़ा कर लिया था. प्रेंडरगास्ट ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से कहा है कि अब्बास के राष्ट्रपति चुने जाने से मध्य पूर्व में व्यापक बदलाव होने की उम्मीद बंधी है. उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को इस मौके का फायदा उठाना चाहिए. |
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