बुधवार, 31 अक्तूबर, 2007 को 08:23 GMT तक के समाचार
नारायण बारेठ
बीबीसी संवाददाता, जयपुर
राजस्थान में सतारूढ़ भारतीय जनता पार्टी में असंतोष अब सतह पर आ गया है.
पार्टी के असंतुष्ट नेता आज पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में विपक्ष के नेता जसवंत सिंह के पैतृक गाँव बाढ़मेर ज़िले के जसौल मे इकट्ठा हो रहे हैं.
इसमें भाग लेने के लिए पार्टी के अनेक वरिष्ठ नेता और मंत्री जसौल पहुँच गए हैं और इसे परिवारिक कार्यक्रम और स्नेहभोज का नाम दिया गया है.
ये मतभेद ऐसे समय सामने आए हैं जब भाजपा सत्ता में अपने चार साल पूरे होने पर जश्न मनाने की तयारी कर रही है.
पार्टी के इन नेताओं ने हाल ही में भाजपा की राज्य कार्यसमिति की चित्तौड़गढ़ में हुई बैठक का बहिष्कार किया था.
बुधवार को जसौल मे नेताओं के जमावड़े को इसी से जोड़ कर देखा जा रहा है.
इस कार्यक्रम मे भाग लेने के लिए भाजपा सांसद ललित चतुर्वेदी, सांसद और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कैलाश मेघवाल, शिक्षा मंत्री घनश्याम तिवारी, उद्योग मंत्री नरपत सिंह, सामजिक न्यायमंत्री मदन दिलावर, संसदीय सचिव महावीर प्रसाद जैन सहित अनके नेता जसौल पहुँच रहे हैं.
जसवंत सिंह पहले ही वहाँ पहुँच चुके हैं.
निशाने पर वसुंधरा
इससे पहले भाजपा ने पिछले हफ्ते राज्य कार्यसमिति की बैठक की थी. इसमें आठ मंत्रियों, 19 सांसदों और 41 विधायकों ने भाग नहीं लिया.
पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी भी इस बैठक में आए, लेकिन इन नेताओं ने बैठक के बहिष्कार का फ़ैसला वापस लेने से इनकार कर दिया.
इन नाराज़ नेताओं ने कुछ मंत्रियों को निशाना बनाकर सीधे मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे को घेरने का प्रयास किया.
वे पार्टी अध्यक्ष महेश शर्मा को हटाने की मांग कर रहे हैं.
उद्योग मंत्री नरपत सिंह पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह के दामाद हैं और वे चित्तौड़गढ़ से विधायक भी हैं, जहाँ भाजपा ने अपनी कार्यसमिति की बैठक की थी.
इसके बावजूद नरपत सिंह ने इसमें भाग नहीं लिया था.
चेतावनी की अनदेखी
हालांकि पार्टी संगठन ने किसी भी बगावत और असंतोष से इंकार किया है.
इन नाराज़ नेताओं को मुख्यमंत्री की कार्यशैली पर ऐतराज़ है.
लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने असंतुष्टों को चेतावनी भी दी की अनुशासन किसी भी क़ीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, पर मतभेद इतने गहरे हैं कि चेतावनी का कोई ख़ास असर नहीं हुआ.
जसवंत सिंह और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के बीच मतभेद उस समय सामने आए जब उनकी पत्नी शीतल कँवर ने जोधपुर मे वसुन्धरा राजे को एक पोस्टर में देवी अन्नपूर्ण बताने पर आपति की और पुलिस को शिकायत दी.
लेकिन पुलिस ने मामला दर्ज करने से इनकार कर दिया.
इस पर शीतल कँवर ने अदालत की शरण ली और अदालत के आदेश पर पुलिस ने मामला दर्ज किया. लेकिन पुलिस को इस पूरी करवाई में कई महीने लगे.
पिछले हफ्ते ही जसवंत सिंह ने कहा कि एक एफ़आईआर दर्ज कराने मे मेरी पत्नी को ही इतना समय लगा तो एक आम आदमी के साथ पुलिस क्या न्याय करेगी?
जसौल सीमावर्ती बारमेढ़ ज़िले में आता है, जहाँ से जसवंत सिंह के पुत्र मानवेन्द्र सिंह भाजपा के सांसद हैं. वे भी अपने इलाक़े मे बाढ़ के बाद राहत की कथित धीमी रफ़्तार के चलते सरकार से नाराज़ हैं.