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हिमाचल प्रदेश में जीत के बाद कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती, कौन बनेगा मुख्यमंत्री?
- Author, पंकज शर्मा
- पदनाम, शिमला से बीबीसी हिंदी के लिए
- कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की है.
- कांग्रेस को 68 में से 40 सीटें मिली है, जबकि बीजेपी को 25 सीटों से संतोष करना पड़ा है.
- हिमाचल प्रदेश में आम आदमी पार्टी अपना खाता भी नहीं खोल पाई.
- लेकिन बहुमत हासिल करने के बाद कांग्रेस के सामने एक बड़ी चुनौती.
- कांग्रेस के सामने सवाल ये है कि वो मुख्यमंत्री किसे बनाए.
- पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह, सुखविंदर सिंह सुक्खू और मुकेश अग्निहोत्री के अलावा और भी कई दावेदार.
हिमाचल प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को हराकर कांग्रेस फिर एक बार सरकार तो बनाने जा रही है.
लेकिन पार्टी में कई नेताओं की दावेदारी के चलते बड़ा सवाल ये बना हुआ है कि इस पहाड़ी राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा.
शुक्रवार को शिमला में कांग्रेस अपनी आगे की रणनीति बनाने के लिए एक हाई लेवल मीटिंग करने जा रही है. इस मीटिंग में मुख्यमंत्री के चेहरों पर चर्चा हो सकती है.
ख़बरों के मुताबिक़ पार्टी की कोशिश ये होगी कि सभी विधायकों से बात करके एक सिंगल लाइन प्रस्ताव पार्टी आलाकमान को भेजा जाए, जिसके बाद आलाकमान नए मुख्यमंत्री के नाम पर अपनी अंतिम मुहर लगा सके.
इस बैठक में पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षक और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और हिमाचल कांग्रेस प्रभारी राजीव शुक्ला सहित कांग्रेस के सभी 40 जीते हुए विधायक मौजूद रहेंगे.
ये भी कयास लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस किसी भी गुटबाज़ी से बचने के लिए मुख्यमंत्री के साथ डिप्टी सीएम बनाने का प्रस्ताव भी रख सकती है.
चुनाव नतीजे आने से पहले कुछ ऐसे नाम थे जिन्हें मुख्यमंत्री पद की दौड़ में गिना जा रहा था. इनमें चम्बा से आशा कुमारी, मंडी से कौल सिंह ठाकुर और नैना देवी से राम लाल ठाकुर शामिल थे. लेकिन चुनाव में मिली हार के बाद ये सभी लोग मुख्यमंत्री पद की दौड़ से बाहर हो गए हैं.
कांग्रेस आलाकमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती मुख्यमंत्री बनने की चाह रखने वाले बड़े नेताओं और बाक़ी विधायकों को साथ लेकर चलना है ताकि उसकी सरकार आतंरिक गुटबाज़ी की भेंट न चढ़ जाए.
हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के क़द्दावर नेता और 6 बार मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह के निधन के बाद राज्य कांग्रेस में एक ख़ालीपन महसूस किया गया.
वीरभद्र सिंह एक मँझे हुए राजनेता थे जो ऊपरी और निचले हिमाचल प्रदेश की राजनीति को संतुलित रखकर चलते थे. लेकिन हिमाचल कांग्रेस के आज के नेतृत्व की बात करें तो उसमें कोई भी ऐसा नेता नहीं दिखता जिसकी पूरे राज्य पर पकड़ हो.
इसके बावजूद इस वक़्त चार नामों की चर्चा ज़ोरों पर है. आइए नज़र डालते हैं हिमाचल प्रदेश मुख्यमंत्री पद के बड़े दावेदारों पर एक नज़र:
प्रतिभा सिंह
प्रतिभा सिंह फ़िलहाल हिमाचल प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष हैं और साथ ही मंडी लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं.
वे छह बार हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की धर्मपत्नी हैं. उन्होनें वीरभद्र सिंह की विरासत का आह्वान करते हुए कांग्रेस पार्टी का चुनावी कैंपेन चलाया और पार्टी का नेतृत्व किया.
चुनाव के बाद उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह की विरासत और उनके परिवार को अनदेखा नहीं किया जा सकता.
वीरभद्र सिंह के राजपरिवार का पूरे हिमाचल में अच्छा ख़ासा रुतबा रहा है और कांग्रेस पार्टी ने वीरभद्र सिंह की साख़ को भुनाने की पूरी कोशिश की है. माना जा रहा है कि प्रतिभा सिंह को वीरभद्र सिंह के क़रीबी और वफ़ादार 12 से 15 विधायकों का समर्थन हासिल है.
प्रतिभा सिंह शिमला ज़िले के रामपुर बुशहर से आती हैं. उनका राजनीतिक सफर साल 2004 में शुरू हुआ जब वे मंडी लोकसभा सीट जीत कर पहली बार सांसद बनी थीं. साल 2013 के उप-चुनाव में वे फिर एक बार मंडी से सांसद बनीं. लेकिन उन्होंने कभी भी कोई विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा है.
ग़ौरतलब है कि प्रतिभा सिंह जिस शिमला ज़िले से आती हैं, वहाँ कांग्रेस ने 8 में से 7 सीटें जीती हैं. साथ ही माना जा रहा है कि उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के ज़्यादातर नज़दीकी नेताओं का समर्थन हासिल है.
इन सब वजहों से प्रतिभा सिंह की मुख्यमंत्री पद की दावेदारी को मज़बूत माना जा रहा है.
अगर कांग्रेस उन्हें मुख्यमंत्री बनाती है, तो उस पर परिवारवाद की राजनीति को बढ़ावा देने के आरोप लग सकते हैं.
विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के लिए कांग्रेस की आलोचना करने का ये बड़ा मुद्दा बन सकता है. लेकिन कांग्रेस की बड़ी चिंता ये है कि कई और दावेदारों के होते हुए, क्या प्रतिभा सिंह की मुख्यमंत्री पद की दावेदारी पार्टी के अन्य गुटों को स्वीकार्य होगी.
सुखविंदर सिंह सुक्खू
हिमाचल की राजनीतिक बिसात पर सुखविंदर सिंह सुक्खू को नज़रअंदाज़ करना भी थोड़ा मुश्किल है. चौथी बार विधायक बने 58 वर्षीय सुखविंदर सिंह सुक्खू हिमाचल कांग्रेस का ऐसा चेहरा हैं, जिन्होंने युवा उम्र से ही कांग्रेस के अलग-अलग पदों पर काम किया है.
सुक्खू कांग्रेस के छात्र विंग एनएसयूआई के अध्यक्ष रहे और बाद में छोटा शिमला से पार्षद भी रहे. साल 2002 में उन्होंने अपना पहला विधानसभा चुनाव लड़ा. इस बार का चुनाव जीतकर वे चौथी बार विधानसभा पहुँचे हैं.
सुक्खू साल 2013 से 2019 तक हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके हैं. उन्हें हिमाचल में कांग्रेस का एक ऐसा बड़ा ज़मीनी नेता माना जाता है जिसकी हिमाचल के सभी 68 विधानसभा क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं के बीच अच्छी पकड़ है.
इस बार के चुनाव से पहले तीन बार विधायक बनने के बावजूद सुक्खू कभी मंत्री नहीं रहे.
वो हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर ज़िले से आते हैं, जहाँ भारतीय जनता पार्टी के प्रेम कुमार धूमल दो बार मुख्यमंत्री रहे हैं.
सुक्खू के बारे में माना जाता है कि वे हमेशा से ही वीरभद्र सिंह के ख़िलाफ़ अपनी राजनीति करते रहे. और यही वजह है कि वीरभद्र सिंह के वफ़ादार लोग जो अब प्रतिभा सिंह के साथ हैं, वे उनके साथ उतनी सहजता से खड़े नहीं हो पाते हैं.
सुक्खू जब पार्टी अध्यक्ष थे तो उस समय के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से लगातार सीधी टक्कर लेते रहे. माना जाता है कि सुक्खू के गुट में वो सभी लोग थे जो किसी न किसी वजह से वीरभद्र सिंह से नाराज़ थे.
नाम ना लिखने की शर्त पर कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता कहते है कि मौजूदा जीते हुए 40 विधायकों में से क़रीब 10 से 12 विधायक सुक्खू गुट में हैं.
मुकेश अग्निहोत्री
पत्रकारिता के पेशे से राजनीति में आए मुकेश अग्निहोत्री कांग्रेस की दूसरी पीढ़ी के क़द्दावर नेताओं में माने जाते हैं. वे हमेशा वीरभद्र सिंह के सबसे क़रीबी नेताओं में से एक रहे हैं.
पिछली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे 60 वर्षीय मुकेश अग्निहोत्री लगातार पाँचवीं बार विधायक बने है. वे लोअर हिमाचल के ऊना ज़िले से आते हैं
साल 2012 से 2017 की कांग्रेस सरकार में मुकेश अग्निहोत्री कैबिनेट मंत्री रहे हैं.
पाँच बार विधायक बनने के बाद मुकेश अग्निहोत्री को अब कांग्रेस की दूसरी पीढ़ी के बड़े नेताओं में गिना ज़रूर जाता है लेकिन ये भी माना जाता है कि हिमाचल के ज़मीनी कार्यकर्ताओं पर उनकी पकड़ अभी उतनी मज़बूत नहीं है जितनी सुखविंदर सिंह सुक्खू की.
सुधीर शर्मा
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने की रेस में राज्य के काँगड़ा ज़िले के धर्मशाला से चौथी बार जीत कर आये विधायक सुधीर शर्मा का नाम भी लिया जा रहा है.
50 वर्षीय सुधीर शर्मा कांग्रेस के जाने माने नेता रहे स्वर्गीय पंडित संत राम शर्मा के पुत्र हैं.
वे कांग्रेस का एक नामी ब्राह्मण चेहरा भी है और उस काँगड़ा ज़िले से आते हैं, जहाँ राज्य में सबसे ज़्यादा 15 विधानसभा सीटें है. काँगड़ा ज़िले से आज तक कांग्रेस का कोई मुख्यमंत्री नहीं बना है. चुनावों के दौरान ये चर्चा का विषय था कि क्या कांग्रेस काँगड़ा को अपनी पार्टी से पहला मुख्यमंत्री देगी.
मुकेश अग्निहोत्री की तरह ही सुधीर शर्मा भी 2012 से 2017 तक हिमाचल सरकार में मंत्री थे.
युवाओं में लोकप्रिय सुधीर शर्मा हिमाचल में अपनी साफ़ छवि और विकास कार्यों के लिए उनके विजन के लिए जाने जाते हैं.
किसमे कितना है दम?
वरिष्ठ पत्रकार डॉ शशि भूषण कहते है कि तीन चेहरे प्रबल दावेदारों में ज़रूर आगे हैं, लेकिन लगातार पाँच बार चुनाव जीत चुके मुकेश अग्निहोत्री को उनके बेहतर काम का फ़ायदा मिल सकता है.
उनके मुताबिक नेता प्रतिपक्ष के तौर पर अग्निहोत्री जयराम ठाकुर सरकार को सदन के अंदर और बाहर कड़ी चुनौती देते रहे और ये बात उनके पक्ष में जा सकती है.
साथ ही उनके पास साल 2012-17 तक मंत्री रहने का तजुर्बा भी है. डॉ शशि भूषण का मानना है कि अगर तीनों मुख्य दावेदारों में से किसी पर भी सहमति नहीं बनी तो सुधीर शर्मा की दावेदारी भी मज़बूत हो सकती है.
वहीं हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के प्रमुख प्रोफ़ेसर डॉ शशिकांत शर्मा कहते हैं कि कांग्रेस हिमाचल में किसी भी सूरत में वीरभद्र की विरासत को छोड़ना नहीं चाहेगी और ऐसे में वो प्रतिभा सिंह के पुत्र और दूसरी बार विधायक बने विक्रमादित्य सिंह को कैबिनेट में अच्छा प्रोफ़ाइल देकर भी मना सकती है.
लेकिन क्या मौजूदा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह इतनी आसानी से मान जाएँगी.
कांग्रेस की जीत के बाद शिमला में आयोजित प्रतिभा सिंह की प्रेस कांफ्रेंस में इसकी एक झलक तब मिली जब मुख्यमंत्री के सवाल पर उन्होने सीधे तौर पर कोई दावा तो नहीं किया लेकिन बार-बार पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की विरासत का ज़िक्र करती दिखीं.
बचाव की मुद्रा में दिखती प्रतिभा सिंह का यही कहना था कि मुख्यमंत्री पद का फ़ैसला आलाकमान और चुने हुए विधायकों की सहमति से ही होगा लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी दावेदारी को मज़बूती से रखने से प्रतिभा सिंह पीछे नहीं हटेंगीं.
सत्ता की सियासत पर बात करते हुए वरिष्ठ पत्रकार संदीप उपाध्याय बताते है कि चौथी बार विधायक बने सुखविंदर सिंह सुक्खू हिमाचल सरकार में कभी भी मंत्री नहीं रहे है.
लेकिन वे उस हमीरपुर ज़िले से आते हैं, जहाँ से दो बार प्रेम कुमार धूमल हिमाचल के मुख्यमंत्री रहे हैं और उनके बेटे अनुराग ठाकुर केंद्रीय मंत्री. ऐसे में वहाँ से कांग्रेस के 5 में से 4 विधायक और एक कांग्रेस के बाग़ी का जीत कर आना सुक्खू की ताक़त को दिखता है.
मुकेश अग्निहोत्री और सुधीर शर्मा दोनों ही शुरू से वीरभद्र सिंह के वफ़ादार माने जाते रहे हैं. लेकिन वीरभद्र सिंह के गुजर जाने के बाद जहाँ सुधीर शर्मा वीरभद्र सिंह के परिवार के साथ ही खड़े रहे, वहीं मुकेश अग्निहोत्री के नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद राज्य की सियासत और कांग्रेस में उनका क़द बढ़ गया.
माना जा रहा है कि नए चुनकर आए विधायकों में से क़रीब 10 विधायक अग्निहोत्री के वफ़ादार हैं.
बहरहाल ये स्पष्ट है कि 68 सीटों वाली हिमाचल प्रदेश विधान सभा में 40 सीटें जीत कर आने के बावजूद कांग्रेस के सामने सबसे पहली चुनौती अगला मुख्यमंत्री तय करने की ही है. ये देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी किस तरह इन अलग-अलग दावेदारों और उनके समर्थकों के गुटों के बीच सामंजस्य बना पाती है.
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