एयर इंडिया क्रैशः पहले से मुसीबत में फंसी बोइंग के लिए मुश्किलें कितनी बढ़ेंगी

बोइंग का विमान

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इमेज कैप्शन, एयर इंडिया का बोइंग 787 ड्रीमलाइनर यात्री विमान गुरुवार को एक हॉस्टल की इमारत पर जा गिरा

12 जून को दोपहर 1 बजकर 38 मिनट पर एयर इंडिया के बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान ने अहमदाबाद के सरदार वल्लभ भाई पटेल एयरपोर्ट से 230 यात्रियों और चालक दल के 12 सदस्यों के साथ उड़ान भरी.

कुछ ही सेकंड बाद ये विमान एयरपोर्ट रनवे से क़रीब 2 किलोमीटर दूर बीजे मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल पर गिरा.

विमान में सवार एक यात्री को छोड़कर सभी लोगों की मौत हो गई. हॉस्टल में मौजूद मेडिकल छात्रों समेत कई अन्य लोग भी इस हादसे में मारे गए हैं.

ये बोइंग 787 ड्रीमलाइनर का पहला हादसा है. पिछले महीने ही 787 ड्रीमलाइनर ने सौ करोड़ से अधिक यात्रियों को सफ़र करवाने का रिकॉर्ड बनाया था.

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14 साल पहले सेवा में आया ये विमान अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्राओं का प्रमुख माध्यम है.

एयर इंडिया क्रैश से पहले इस विमान का सुरक्षा रिकॉर्ड बेहतरीन रहा है.

एयर इंडिया का जो बोइंग 787 ड्रीमलाइनर हादसे का शिकार हुआ है, वह भी 12 साल पहले सेवा में आया था.

ये विमान हादसे का शिकार होने से पहले आठ हज़ार से अधिक टेक ऑफ़ और लैडिंग कर चुका था. एयर इंडिया के पास ऐसे 27 विमान हैं, जिनमें से एक अब क्रैश हो चुका है.

अहमदाबाद में हुए इस हादसे ने ना सिर्फ़ बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान का सुरक्षा रिकॉर्ड ख़राब किया है बल्कि ये हादसा पहले से चुनौतियों में घिरी बोइंग के लिए भी मुश्किलें पैदा कर सकता है.

हालांकि ये पहली बार नहीं है जब बोइंग का कोई विमान हादसों को लेकर ख़बरों में हो. 2018 और 2019 में इंडोनेशिया और इथियोपिया में बोइंग के विमान क्रैश हुए थे और सैकड़ों लोग इन हादसों में मारे गए थे. तब बोइंग 737 मैक्स हादसों का शिकार हुआ था. ये ड्रीमलाइनर से अलग विमान है.

उन हादसों की वजह सॉफ़्टवेयर में आई ख़ामियां थीं और उस मॉडल के विमानों को दुनियाभर में 18 महीनों के लिए उड़ान भरने से रोकना पड़ा था.

बोइंग का 787 ड्रीमलाइनर यात्री विमान साल 2011 में लांच हुआ था

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हालांकि, अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं है कि इस हादसे में बोइंग की तरफ़ से कोई ख़ामी रही है.

हादसे का शिकार हुए विमान के ब्लैक बॉक्स मिलने और हादसे के कारणों की जांच पूरी होने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ़ हो सकेगी कि ग़लती बोइंग की थी या नहीं.

इस हादसे के कारणों को लेकर कई थ्योरी दी जा रही हैं. बीबीसी संवाददाता निक मार्श से बात करते हुए एक पायलट ने कहा, “आज के दौर में ये दुर्लभ है कि विमान निर्माता की किसी ख़ामी की वजह से कोई बड़ा हादसा हो जाए.”

उन्होंने कहा, “अगर बोइंग 737 मैक्स से जुड़े हादसों को छोड़ दिया जाए तो अधिकतर विमान हादसे कॉकपिट में हुई मानवीय ग़लती की वजह से होते हैं.”

दुनिया में अधिकतर यात्री विमान इस समय दो ही कंपनियां बनाती हैं- बोइंग और एयरबस.

अगर आप किसी कमर्शियल विमान से यात्रा करते हैं तो बहुत संभव है आप इन दोनों में से किसी एक कंपनी के बनाए विमान में बैठे हों.

यात्री विमान उत्पादन उद्योग में प्रभावी रूप से बोइंग और एयरबस का ही दो-तरफ़ा एकाधिकार है.

अब एक बार फिर, एक दुखद विमान हादसे के साथ बोइंग का नाम जुड़ गया है.

अहमदाबाद विमान हादसे के बाद बोइंग ने कहा है- “हमारी संवेदनाएं यात्रियों, चालक दल और बचावकर्मियों और इस हादसे से प्रभावित सभी लोगों के साथ हैं.”

बोइंग ने ये भी कहा है कि वह हादसे के बारे में अधिक जानकारी इकट्ठा करने के लिए एयर इंडिया के साथ मिलकर काम कर रही है.

बोइंग के सीईओ कैली ओटबर्ग ने यात्रियों और उनके परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्ति करते हुए कहा है कि बोइंग हादसे की जांच में मदद करेगी.

भारत का एयरक्राफ़्ट एक्सीडेंट इंवेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी) इस हादसे की जांच कर रहा है.

इस हादसे के बाद जब गुरुवार को अमेरिका में बाज़ार बंद हुए तो बोइंग के शेयर 5 प्रतिशत तक गिर चुके थे.

बोइंग कई साल से विवादों और परेशानियों में चल रही है. पिछले साल कंपनी को हर महीने एक अरब डॉलर का नुक़सान हुआ. अब इस हादसे ने ज़ाहिर तौर पर बोइंग के लिए मुश्किलें और बढ़ा दी हैं.

कंपनी विमानों की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों के संकट और गुणवत्ता नियंत्रण से जुड़े विवादों से संघर्ष कर रही है. पिछले साल कंपनी के कर्मचारियों ने सात सप्ताह तक हड़ताल की, जिसका भी भारी नुक़सान कंपनी को उठाना पड़ा.

पिछले साल अलास्का एयरलाइन की एक उड़ान के दौरान बोइंग के विमान का दरवाज़ा हवा में ही उड़ गया था. इस हादसे में विमान सुरक्षित एयरपोर्ट पर लौटने में कामयाब रहा था और किसी की जान नहीं गई थी. लेकिन कंपनी को 16 करोड़ डॉलर का हर्जाना चुकाने के लिए मजबूर होना पड़ा.

737 मैक्स विमानों के हादसे के बाद उड़ानों पर रोक लगने के कारण बोइंग को साउथवेस्ट एयरलाइंस को हुए वित्तीय नुक़सान की भरपाई के लिए भी 42.8 करोड़ डॉलर चुकाने पड़े थे.

बीते साल बोइंग के कर्मचारियों ने कंपनी प्रबंधन के ख़िलाफ़ लंबी हड़ताल की थी. इससे भी बोइंग की सेहत पर असर हुआ

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इमेज कैप्शन, बीते साल बोइंग के कर्मचारियों ने कंपनी प्रबंधन के ख़िलाफ़ लंबी हड़ताल की थी, इससे भी बोइंग की सेहत पर असर हुआ

लेकिन बोइंग के लिए समस्याएं सिर्फ़ वित्तीय ही नहीं है. विमानों की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवाल और भी गंभीर हैं.

इसी साल अप्रैल में ही कंपनी ने कहा था कि ‘सुरक्षा और गुणवत्ता को लेकर हमारे निरंतर प्रयास जारी हैं और इसके नतीजे में विमानों के संचालन में सुधार हुआ है.’

साल 2019 में बोइंग के एक कर्मचारी जॉन बर्नेट ने बीबीसी को बताया था कि दबाव में काम कर रहे कर्मचारी जानबूझकर मानकों पर खरे ना उतरने वाले कल-पुर्ज़े विमानों में लगा रहे हैं.

32 साल तक बोइंग के क्वालिटी कंट्रोल मैनेजर के रूप में काम करने वाले जॉन बर्नेट मार्च 2017 में स्वास्थ्य कारणों से रिटायर हो गए थे. उन्होंने पिछले साल मार्च में आत्महत्या कर ली थी. बोइंग ने जॉन बर्नेट के आरोपों को निराधार बताया था.

बोइंग से जुड़े एक इंजीनियर सैम सालाेहपोर ने भी बोइंग से जुड़ी कुछ जानकारियों को उजागर किया था और अमेरिकी राजनेताओं से कहा था कि बोइंग ने उन्हें धमकियां दी और उत्पीड़न किया.

सैम सालेहपुर ने भी बोइंग विमानों की सुरक्षा से खिलवाड़ को लेकर दावे किए थे.

हालांकि, बोइंग ने भी अपने कर्मचारियों से कहा था कि अगर उन्हें विमानों की सुरक्षा के बारे में चिंताएं हैं तो वे साझा करें.

बोइंग का ये भी कहना है कि किसी कर्मचारी पर प्रतिक्रियात्मक कार्रवाई नहीं होगी.

बोइंग ने ये दावा भी किया है कि जनवरी के बाद से कर्मचारियों के सुरक्षा को लेकर जानकारियां देने में 500 फ़ीसदी की वृद्धि हुई है और इसका संकेत ये है कि ‘बोइंग में जानकारी देने की संस्कृति में प्रगति हुई है और प्रतिक्रिया का डर नहीं है.’

बोइंग

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इमेज कैप्शन, बोइंग इस समय वित्तीय और क़ानूनी चुनौतियों से जूझ रही है, एयर इंडिया हादसे ने अब फिर से कंपनी की साख़ पर सवाल उठा दिए हैं

बोइंग इंडोनेशिया और इथियोपिया में हुए विमान हादसों की वजह से भी क़ानूनी विवादों में फंसी हैं. पिछले महीने ही बोइंग ने अमेरिका के न्याय विभाग से समझौता किया और आपराधिक मुक़दमे से बाल-बाल बची.

पीड़ितों के परिवारों को इससे ज़रूर झटका लगा. अमेरिका के न्याय मंत्रालय ने बताया कि बोइंग ने स्वीकार किया है कि उसने अमेरिका के एफ़एफ़ए (संघीय विमान प्राधिकरण) की जांच को प्रभावित करने के लिए साज़िश की. बोइंग हर्जाने में 1.1 अरब डॉलर चुकाएगी.

पिछले कुछ सालों में बोइंग के शीर्ष नेतृत्व में भी बड़ा बदलाव हुआ है. हालांकि ये कोई हैरानी की बात नहीं है.

संकट से गुज़र रही कंपनी को बचाने के लिए कैली ओर्टबर्ग रिटायर होने के एक साल बाद वापस आए और सीईओ के पद की ज़िम्मेदारी संभाली.

उन्होंने सुरक्षा को लेकर बोइंग की संस्कृति में बदलाव लाने का वादा किया है और उन्होंने हाल ही में कहा था कि उन्हें विश्वास है कि जल्द ही बोइंग फिर से मुनाफ़े में लौटेगी.

अब बोइंग के सामने एक और बड़ा संकट खड़ा हो गया है और इससे निकलना कंपनी के लिए आसान नहीं होगा.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित